अफसरशाही के फेर में फंसी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, 03 महीने से मानदेय को तरसीं, क्या यही है शासन की दूरदर्शिता?
Junaid Khan - शहडोल। महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत जयसिंहनगर परियोजना में पदस्थ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ विभागीय अधिकारियों द्वारा किए जा रहे तानाशाहीपूर्ण रवैये का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। परियोजना अधिकारी और निचले अमले की मनमानी का आलम यह है कि नियमों को दरकिनार कर कार्यकर्ताओं का वेतन रोक दिया गया है। करीब तीन महीने से मानदेय न मिलने के कारण आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के सामने अपने परिवारों का पालन-पोषण करना बेहद कठिन हो गया है। कार्यकर्ताओं ने सीधा आरोप लगाया है कि उन्हें बिना किसी पूर्व लिखित नोटिस या सूचना के सीधे मानदेय रोकने जैसी दंडात्मक कार्रवाई का शिकार बनाया गया है। एक तरफ जहां सरकार कुपोषण मिटाने और महिला सशक्तिकरण का ढिंढोरा पीटती है, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर काम करने वाली इन कार्यकर्ताओं को बेहद कम मानदेय देकर उस पर भी अकारण रोक लगा दी जाती है। तकनीकी खामियों या सर्वर मेंटेनेंस के कारण 'पोषण ट्रैकर ऐप' में होने वाली गफलत को बहाना बनाकर प्रशासनिक अधिकारी अपनी नाकामियों का ठीकरा इन गरीब कार्यकर्ताओं के सिर फोड़ रहे हैं, जो सीधे तौर पर विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली और प्रशासनिक दूरदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
प्रशासनिक लापरवाही और तुगलकी फरमान,क्या सिर्फ कार्यकर्ताओं पर ही गाज गिराएगा विभाग?
पूरे मामले पर यदि विभागीय अधिकारियों के रवैये को देखें तो जयसिंहनगर परियोजना अधिकारी अजय मिश्रा का तर्क है कि पोषण ट्रैकर ऐप में स्वसहायता समूहों द्वारा दिए जाने वाले नाश्ता-भोजन की उपस्थिति, टीएचआर एंट्री, बच्चों का वजन-ऊंचाई और सेम-मेम बच्चों की एंट्री न करने पर यह कार्रवाई की गई है। लगभग दो दर्जनों कार्यकर्ताओं को नोटिस जारी करने का दावा किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर, जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) अखिलेश मिश्रा का कहना है कि मानदेय बहाल करने की अनुशंसा की गई है। परंतु बड़ा सवाल यह उठता है कि जब जमीनी स्तर पर सिस्टम ही फेल है और सर्वर की समस्याओं के कारण एंट्री पेंडिंग होती है, तो उसका खामियाजा सिर्फ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को ही क्यों भुगतना पड़े? क्या विभाग के उच्च अधिकारियों और परियोजना कार्यालय में बैठे जिम्मेदार अफसरों की कोई जवाबदेही तय नहीं होती? अधिकारियों द्वारा सिर्फ कागजी लीपापोती कर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लिया जाता है। यदि समय रहते जिम्मेदार अधिकारियों ने अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया और कार्यकर्ताओं का मानदेय तुरंत खातों में जारी नहीं किया, तो यह मामला न केवल जनआंदोलन का रूप लेगा बल्कि विभाग की इस घोर लापरवाही और तानाशाही के खिलाफ जिला प्रशासन से लेकर शासन स्तर तक सीधी चुनौती पेश की जाएगी।
