स्वास्थ महकमे की लापरवाही से ब्योहारी में अवैध पैथोलॉजी का बोलबाला,जिला प्रशासन की धमक से भागे संचालक

सीएमएचओ के सख्त आदेशों के बाद भी बीएमओ की संदिग्ध चुप्पी, जन विश्वास शिविर के दिन ताला लगाकर गायब हुए झोलाछाप जांच केंद्र, सिविल अस्पताल में मरीजों की लगी लंबी कतारें।


Junaid Khan - शहडोल। जनता की जागरूकता और प्रशासनिक हनक के बीच खुलकर सामने आया स्वास्थ्य विभाग का रवैया। ब्योहारी विकासखंड में लंबे समय से मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे अवैध पैथोलॉजी सेंटरों और एक्स-रे क्लिनिकों पर शनिवार को अचानक ताले लटक गए। कारण कोई विभागीय कार्रवाई नहीं, बल्कि क्षेत्र में 'मुख्यमंत्री जन विश्वास शिविर' के सिलसिले में कलेक्टर सहित तमाम वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों का अचानक आगमन रहा। जिला स्तर के बड़े अधिकारियों के ब्योहारी पहुंचते ही रोजाना सुबह से देर रात तक बेधड़क चलने वाले अवैध सेंटरों के संचालक दुकानें बंद कर रफूचक्कर हो गए। मातेश्वरी पैथोलॉजी एंड एक्स-रे, पटेल पैथोलॉजी एंड एक्स-रे और एडवांस्ड पैथोलॉजी एंड एक्स-रे समेत नगर भर के ऐसे तमाम फर्जी जांच केंद्र दिनभर पूरी तरह बंद रहे। प्रशासनिक अमले के डर से अवैध धंधेबाजों का इस तरह भागना यह साबित करता है कि स्थानीय जनता और क्षेत्र के जागरूक नागरिक जिस फर्जीवाड़े की आवाज लगातार उठा रहे थे, वह शत-प्रतिशत सही है। जनता के इस सजग रुख और जिला प्रशासन के कड़े तेवरों के कारण शनिवार को इन झोलाछाप संचालकों में हड़कंप का माहौल देखने को मिला।

लापरवाह अफसरशाही और सीएमएचओ के निर्देशों पर बीएमओ की चुप्पी पर खड़े हुए गंभीर सवाल 

इस पूरे घटनाक्रम ने ब्योहारी के स्थानीय स्वास्थ्य प्रशासन, बीएमओ निशांत सिंह और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) द्वारा एक सप्ताह पूर्व ही इन अवैध पैथोलॉजी सेंटरों को तत्काल बंद कराने और कठोर दंडात्मक कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे, लेकिन बीएमओ स्तर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। स्थानीय सूत्रों और प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि पूर्व में अपनी विवादित कार्यशैली के कारण हटाए गए बीएमओ ने जुगाड़ के बल पर पुनः पदस्थापना तो पा ली, लेकिन अवैध क्लिनिकों व पैथोलॉजी पर कार्रवाई के नाम पर निष्क्रियता साध रखी है। स्थिति यह है कि सीएमएचओ के भारी दबाव में महज खानापूर्ति करते हुए केवल दो पैथोलॉजी सेंटरों को सील किया गया, जबकि बीएमओ की कथित मिलीभगत और शह के चलते सिविल अस्पताल के ठीक सामने संचालित होने वाले अन्य अवैध सेंटरों पर कोई आंच नहीं आई।

अवैध संचालकों और लचर तंत्र का खामियाजा भुगतने को मजबूर हुई बेबस जनता 

एक तरफ जहां प्रशासनिक दबाव के चलते अवैध पैथोलॉजी संचालक दुकानें बंद कर भाग निकले, वहीं दूसरी तरफ इस लचर व्यवस्था का सीधा खामियाजा दूर-दराज से आए असहाय मरीजों और उनके परिजनों को भुगतना पड़ा। शनिवार को सिविल अस्पताल में मरीजों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। शासकीय अस्पताल में जांच के लिए सुबह से ही लंबी-लंबी कतारें देखने को मिलीं, जिसके चलते कई मरीजों को जांच के बिना ही अगले दिन का नंबर देकर लौटा दिया गया। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मनमानी, शासन-प्रशासन के आदेशों की अवहेलना और जनस्वास्थ्य के प्रति इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये से जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है। अब क्षेत्र की जनता और जागरूक नागरिक सीधे मध्य प्रदेश शासन, स्वास्थ्य मंत्रालय और जिला कलेक्टर से मांग कर रहे हैं कि ऐसे गैर-जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए और ब्योहारी में पनप रहे अवैध पैथोलॉजी नेटवर्क को जड़ से समाप्त किया जाए।

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