सरपंचों के अधिकारों की बुलंद आवाज बनेगा 30 सितंबर का भोपाल आंदोलन

राष्ट्रीय सरपंच संघ मध्यप्रदेश का प्रदेशव्यापी अभियान तेज 11 सितंबर से आंदोलन की तैयारियों का आगाज, 15-16 सितंबर को शहडोल में महत्वपूर्ण बैठक 



Junaid Khan - शहडोल। ग्राम पंचायतों को लोकतंत्र की सबसे मजबूत और पहली कड़ी माना जाता है। गांव के विकास, जनसमस्याओं के समाधान और शासन की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में सरपंचों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इसके बावजूद पंचायत प्रतिनिधियों को अपने अधिकारों, पर्याप्त वित्तीय अधिकारों, विकास कार्यों में स्वतंत्रता और अन्य समस्याओं को लेकर लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है। इन्हीं मुद्दों को लेकर राष्ट्रीय सरपंच संघ मध्यप्रदेश द्वारा आगामी 30 सितंबर को भोपाल में विशाल आंदोलन आयोजित किया जा रहा है। आंदोलन को प्रदेशव्यापी स्वरूप देने के लिए सरपंच संघ ने व्यापक जनसंपर्क एवं बैठक अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। प्रदेश अध्यक्ष शिवेंद्र सिंह ने प्रदेश के सभी जिलों के जिला एवं ब्लॉक अध्यक्षों तथा सरपंच साथियों से आंदोलन की सफलता के लिए सक्रिय भागीदारी की अपील की है।

दतिया से होगा प्रदेशव्यापी अभियान का आगाज

सरपंच संघ का आंदोलनात्मक अभियान 11 सितंबर को दतिया स्थित मां पीतांबरा पीठ के दर्शन के साथ प्रारंभ होगा। इसके बाद संगठन का काफिला प्रदेश के विभिन्न जिलों में पहुंचकर सरपंचों के साथ बैठक करेगा और आगामी भोपाल आंदोलन की रणनीति, मुद्दों तथा तैयारियों पर चर्चा करेगा। इसी क्रम में 15 सितंबर को अभियान शहडोल जिले में प्रवेश करेगा। शहडोल में रात्रि भोजन एवं विश्राम के बाद 16 सितंबर को सुबह 11 बजे सोहागपुर जनपद सभागार में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक के बाद काफिला उमरिया जिले के लिए रवाना होगा।

ब्लॉक स्तर तक पहुंचेगी आंदोलन की आवाज

प्रदेश अध्यक्ष शिवेंद्र सिंह ने सभी ब्लॉक अध्यक्षों से कहा है कि वे अपने-अपने ब्लॉक में बैठक आयोजित कर प्रत्येक ग्राम पंचायत के सरपंच तक आंदोलन के उद्देश्य और मांगों की जानकारी पहुंचाएं। उन्होंने सरपंच साथियों से अपील की है कि 16 सितंबर को सोहागपुर जनपद सभागार में समय पर पहुंचकर बैठक में शामिल हों, ताकि आंदोलन की रणनीति को समझने के साथ अपनी स्थानीय समस्याओं और सुझावों को भी संगठन के सामने रखा जा सके।

सरपंचों के हित और अधिकार आंदोलन के केंद्र में 

सरपंच संघ का कहना है कि ग्राम पंचायतों को केवल जिम्मेदारियां देने के बजाय उन्हें पर्याप्त अधिकार, संसाधन और वित्तीय स्वायत्तता भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। गांव के विकास की जिम्मेदारी सीधे पंचायत प्रतिनिधियों पर होती है, लेकिन कई बार आवश्यक संसाधनों और निर्णय लेने की स्वतंत्रता के अभाव में सरपंचों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। सरपंचों के प्रमुख हितों में पंचायतों को समय पर पर्याप्त राशि उपलब्ध कराना, विकास कार्यों में अनावश्यक बाधाओं को दूर करना, सरपंचों को उनके अधिकारों के अनुरूप प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकार देना, पंचायत प्रतिनिधियों के सम्मान एवं सुरक्षा को सुनिश्चित करना तथा ग्राम पंचायतों को मजबूत एवं आत्मनिर्भर बनाना जैसे विषय महत्वपूर्ण हैं। सरपंच संघ का मानना है कि जब तक गांव की सरकार को मजबूत नहीं किया जाएगा, तब तक ग्रामीण विकास को अपेक्षित गति नहीं मिल सकती। इसलिए पंचायत प्रतिनिधियों की समस्याओं का समाधान केवल सरपंचों का मुद्दा नहीं, बल्कि गांव के विकास और स्थानीय लोकतंत्र को मजबूत करने का विषय है।

29 सितंबर को भोपाल कूच,30 को होगा विशाल आंदोलन 

राष्ट्रीय सरपंच संघ मध्यप्रदेश ने प्रदेश के सभी सरपंच भाइयों से आह्वान किया है कि वे 29 सितंबर को भोपाल के लिए कूच करें और 30 सितंबर को आयोजित विशाल आंदोलन में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें। संगठन का उद्देश्य आंदोलन के माध्यम से प्रदेश के हजारों पंचायत प्रतिनिधियों की आवाज को शासन-प्रशासन तक मजबूती से पहुंचाना है। संघ ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन की सफलता प्रदेश के प्रत्येक जिले, ब्लॉक और ग्राम पंचायत से मिलने वाले सहयोग पर निर्भर करेगी। शहडोल में 16 सितंबर की बैठक को इसी प्रदेशव्यापी आंदोलन की तैयारियों की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। संगठन ने सभी ब्लॉक अध्यक्षों और सरपंच साथियों से एकजुट होकर अभियान को सफल बनाने की अपील की है। गांव की सरकार को अधिकार और सम्मान मिले, पंचायतें मजबूत हों और सरपंचों की आवाज शासन तक पहुंचे”इसी उद्देश्य के साथ अब सरपंच संघ भोपाल में अपनी ताकत का प्रदर्शन करने की तैयारी में है।

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