जिला पंचायत अटैच जयसिंहनगर में अभद्र व्यवहार और डराने-धमकाने का मामला,सवालों के घेरे में जिम्मेदार तंत्र और जांच प्रक्रिया
Junaid Khan - शहडोल। प्रशासनिक संरक्षण और अधिकारियों की तानाशाही कार्यशैली का एक गंभीर मामला जयसिंहनगर से सामने आया है, जहाँ महिलाओं के प्रति अशोभनीय और भययुक्त माहौल बनाने का आरोप एक जिम्मेदार अधिकारी पर लगा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, जयसिंहनगर जनपद के गोपालपुर संकुल में पदस्थ सहायक विकासखंड प्रबंधक (ABPM) पूजा एस दीक्षित के खिलाफ महिलाओं को अपमानित करने,डराने-धमकाने और अमर्यादित आचरण करने की लिखित शिकायतें और वीडियो क्लिप्स सार्वजनिक हुई थीं। मामले के उजागर होने के बाद जिला पंचायत शहडोल हरकत में आया। मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) शिवम प्रजापति ने मामले को संज्ञान में लेते हुए पूजा एस दीक्षित को विकासखंड प्रबंधक/प्रभारी जयसिंहनगर के दायित्वों से तत्काल प्रभाव से मुक्त कर जिला कार्यालय शहडोल में संलग्न (अटैच) कर दिया है। हालांकि, इस कार्रवाई के बाद भी कई कड़े सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर क्यों शासकीय पदों पर बैठे जिम्मेदार अधिकारी अपनी सीमाएं लांघकर आम जनता और विशेषकर महिलाओं से ऐसा दुर्व्यवहार करने का दुस्साहस करते हैं? क्या केवल अटैचमेंट और तीन सदस्यीय जांच दल का गठन ही पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए पर्याप्त है, या यह महज औपचारिकता पूरी कर मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश है? जयसिंहनगर क्षेत्र में जिस तरह से दबाव और भय का माहौल बनाकर कार्यप्रणाली चलाई जा रही थी, उससे पूरे प्रशासनिक अमले की निष्पक्षता और नीयत पर उंगली उठ रही है। अब देखना यह होगा कि गठित जांच दल निष्पक्षता से अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की सिफारिश करता है, या फिर सांठगांठ के खेल में इस गंभीर लापरवाही व कृत्य पर पर्दा डाल दिया जाता है।
