बरुहा नदी किनारे 18 वर्षीय अविनाश की नृशंस हत्या से क्षेत्र में दहशत, पुलिस की गश्त और मुस्तैदी पर उठे गंभीर सवाल
Junaid Khan - शहडोल। सिंहपुर थाना क्षेत्र के अतरिया टोला बोड़री गांव में 18 वर्षीय मासूम युवक अविनाश नापित की धारदार हथियार से गला रेतकर की गई जघन्य हत्या ने क्षेत्र में कानून व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की साख पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। बरुहा नदी के किनारे खून से लथपथ पड़े अविनाश को जब परिजन और ग्रामीण बदहवास हालत में अस्पताल ले जा रहे थे, तभी रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। इस रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात के बाद पूरे इलाके में दहशत के साथ-साथ पुलिस-प्रशासन की सुस्ती और निकम्मेपन को लेकर तीव्र जनाक्रोश पनप रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का साफ तौर पर कहना है कि थाना क्षेत्र में अवैध गतिविधियों पर लगाम कसने के बजाय पुलिस सुस्त रवैया अपनाए हुए है। रात के समय न तो गश्त होती है और न ही असामाजिक तत्वों पर कोई खौफ है, जिसके चलते बेखौफ अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और वे सरेआम ऐसी भयानक वारदातों को अंजाम देकर आसानी से फरार हो जाते हैं। घटना के बाद मौके पर पहुंचे अधिकारियों को जनता के भारी विरोध और तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। इस दिल दहला देने वाली घटना ने जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस महकमे के दावों की कलई खोलकर रख दी है। मामले में सिंहपुर थाना प्रभारी एसपी चतुर्वेदी का कहना है कि अज्ञात आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर जांच की जा रही है और साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं, लेकिन हत्या किसने और किस वजह से की, इसका कोई सुराग अब तक पुलिस के हाथ नहीं लगा है। केवल औपचारिक औचक निरीक्षण और पोस्टमार्टम कराने तक सीमित पुलिसिया कार्रवाई से गुस्साए ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि पुलिस तंत्र की नाकामी और ढुलमुल रवैये के कारण ही आज आम नागरिक अपने ही गांव-मोहल्ले में सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा है। जनता अब केवल कागजी जांच और आश्वसनों से संतुष्ट होने वाली नहीं है; उग्र ग्रामीणों ने जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और मुख्य आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की पुरजोर मांग की है।
