शर्मनाक वीडियो वायरल होने के बाद जनआक्रोश चरम पर, नगर पालिका, जिला प्रशासन और कथित गौ-सेवकों की भूमिका पर उठने लगे बड़े सवाल
Junaid Khan - शहडोल। जिस देश की संस्कृति में गाय को माता का दर्जा देकर पूजा जाता है और जिसे राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के लिए पूरे देश में बहस चल रही है, उसी मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में प्रशासनिक संवेदनहीनता और निर्दयता का एक ऐसा जघन्य कृत्य सामने आया है जिसने समूचे मानवता के साथ-साथ पूरे प्रशासनिक तंत्र को शर्मसार कर दिया है। 8 सितंबर 2026 को सामने आए इस शर्मनाक मामले में नगर पालिका शहडोल के स्वच्छता तंत्र की असली हकीकत उजागर हो गई है। जमुई के समीप बघेल ढाबे के पीछे बने हेलीपैड क्षेत्र में, जहाँ शहर भर का सड़ा-गला और नालियों का कचरा डाला जाता है, वहाँ नगर पालिका की मैजिक कचरा गाड़ी से कचरे के साथ-साथ एक मृत गाय और एक छोटे नवजात बछड़े (घोड़े या गधे के बच्चे) के शव को कचरे की तरह सड़क पर पलट दिया गया। इस अमानवीय और घृणास्पद कृत्य का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हड़कंप मच गया है। जिस तरह से भगवान तुल्य माने जाने वाले जीव के शव को कचरे की ट्रॉली उठाकर कचरे के ढेर में पटका गया, उसने न केवल आम जनता की आँखें नम कर दी हैं बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता पर एक ज्वलंत प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।
नालियों की गंदगी खाने को मजबूर बेसहारा मवेशी, पशुपालकों और नगर पालिका का दोहरा पाप
वायरल वीडियो में केवल मृत गौवंश की बदहाली ही दिखाई नहीं दे रही, बल्कि उससे भी ज्यादा भयावह और शर्मनाक मंजर यह देखने को मिला कि शहर के नालों और गंदी गलियों से उठाया गया जहरीला कचरा जहाँ पलटा गया था, वहाँ दर्जनों जीवित गायें और बैल उसी दूषित कचरे को खाने को मजबूर थे। यह स्थिति सीधे तौर पर उन स्वार्थी और लापरवाह पशुपालकों की पोल खोलती है जो सुबह-शाम गाय का दूध निकालकर बेच लेते हैं और बाकी समय उन्हें सड़कों पर जहर और पॉलिथीन खाने के लिए लावारिस छोड़ देते हैं। एक तरफ जहरीला कचरा खाकर तिल-तिल मरने को मजबूर बेसहारा मवेशी और दूसरी तरफ मरने के बाद उनके शवों के साथ कचरा गाड़ी में यह अमर्यादित व्यवहार; यह दृश्य स्पष्ट करता है कि शहडोल में बेजुबान जानवरों के लिए तंत्र पूरी तरह से संवेदनहीन हो चुका है। जिम्मेदार अधिकारी अपनी आँखें मूँदे बैठे हैं और जनता की धार्मिक भावनाओं के साथ सरेआम खिलवाड़ किया जा रहा है।
संसाधनों से लैस नगर पालिका की घोर लापरवाही, क्या गड्ढा खोदने के लिए भी बजट नहीं?
सफाई और स्वच्छता के नाम पर हर महीने लाखों-करोड़ों रुपए का बजट ठिकाने लगाने वाली शहडोल नगर पालिका के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है। नगर पालिका के पास अत्याधुनिक जेसीबी मशीनें, ट्रैक्टर और कर्मचारी मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद किसी मृत पशु को सम्मानजनक तरीके से गड्ढा खुदवाकर दफनाने के बजाय उसे शहर की नालियों के कचरे में लादकर फेंक देना किस प्रकार की कार्यप्रणाली है? क्या नगर पालिका प्रशासन के लिए नियम और मर्यादाएँ कोई मायने नहीं रखतीं? किसी भी मृत जीव, विशेषकर गौमाता के अंतिम संस्कार की एक निश्चित और सम्मानजनक प्रक्रिया होती है, लेकिन यहाँ जिम्मेदार कर्मचारियों और ठेकेदारों ने शर्म की सारी हदें पार करते हुए उन्हें कचरे का हिस्सा बना दिया। यह केवल एक प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि एक अक्षम्य अपराध है, जिसकी जिम्मेदारी नगर पालिका के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) से लेकर संबंधित स्वच्छता निरीक्षकों की बनती है।
तथाकथित समाजसेवी और मौन गौ-शालाएँ: सिर्फ सम्मान पाने तक सीमित है गौ-सेवा?
इस हृदयविदारक घटना ने जिले में संचालित होने वाली दर्जनों गौ-शालाओं, बड़ी-बड़ी बातें करने वाले नेताओं और खुद को सोशल मीडिया पर 'गौ-सेवक' बताने वाले तथाकथित समाजसेवियों के दोहरे चरित्र को भी पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। आए दिन अखबारों और सोशल मीडिया पर मालाएं पहनकर सम्मानित होने वाले ये समाजसेवी और गौ-शाला संचालक आज इस गंभीर मुद्दे पर मौन क्यों साधे हुए हैं? जो संगठन बात-बात पर सड़कों पर उतरने का दावा करते हैं, वे नगर पालिका के इस कृत्य पर खामोश बैठकर तमाशा देख रहे हैं। क्या इनकी गौ-सेवा सिर्फ पोस्टरों, विज्ञापनों और सरकारी अनुदान बटोरने तक ही सीमित है? अगर वार्ड वासियों या आम जनता से चूक हुई भी, तो क्या इन संस्थाओं और नेताओं का यह नैतिक कर्तव्य नहीं था कि वे इस पर तुरंत कड़ा संज्ञान लेते और दोषियों के खिलाफ मोर्चा खोलते?
प्रशासनिक निष्क्रियता पर उठे सवाल, प्रदेश के मुख्यमंत्री और मंत्रियों तक पहुँचेगी गूँज
शहडोल जिले की इस घटना ने न केवल स्थानीय प्रशासन की विफलता को दिखाया है बल्कि राज्य सरकार के उन दावों की भी हवा निकाल दी है जिनमें गौ-संरक्षण और संवर्धन की बड़ी-बड़ी घोषणाएँ की जाती हैं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश के गृह मंत्री, नगर विकास मंत्री और यहाँ तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौर में अगर किसी जिले की नगर पालिका गौमाता के शव को कचरा गाड़ी में भरकर डंपिंग यार्ड में फेंक रही है, तो यह पूरी सरकार की साख पर बड़ा धब्बा है। जब यह वीडियो पूरे देश में देखा जा रहा है, तब भी जिम्मेदार अधिकारी अपनी कुंभकर्णी नींद से जागने को तैयार नहीं हैं। जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि आखिर कब तक आस्था, धर्म और बेजुबानों के अधिकारों का इस तरह सरेआम मज़ाक उड़ाया जाता रहेगा और प्रशासन मूकदर्शक बना रहेगा?
दोषी अधिकारियों पर एफआईआर और तत्काल बर्खास्तगी की माँग, उग्र आंदोलन की चेतावनी
इस अक्षम्य घटना के सामने आने के बाद पूरे जिले की जनता,धर्मप्रेमी और जागरूक नागरिक आक्रोश की आग में झुलस रहे हैं। जनता की स्पष्ट माँग है कि इस कृत्य में शामिल मैजिक वाहन के चालक, कचरा उठाने वाले कर्मचारियों से लेकर इस कचरा प्रबंधन के ज़िम्मेदार सुपरवाइजर, स्वच्छता निरीक्षक और संबंधित नगर पालिका अधिकारियों के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम और धार्मिक भावनाओं को आघात पहुँचाने की धाराओं के तहत तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए। केवल लीपापोती या कारण बताओ नोटिस जारी करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि दोषी कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त किया जाना चाहिए। यदि जिला कलेक्टर और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा इस मामले में कठोरतम कार्रवाई नहीं की जाती, तो आने वाले दिनों में उग्र जनांदोलन, नगर पालिका का घेराव और उग्र प्रदर्शन होना तय है, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
