न्याय और सुशासन की जीत,हाई कोर्ट के फैसले के बाद शहडोल नगरपालिका में नियमों का पालन,प्रशासनिक व्यवस्था को मिली मजबूती

हाईकोर्ट जबलपुर के ऐतिहासिक आदेश के तहत गलत तबादला निरस्त,शहरी विकास एवं सुशासन के प्रति जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने जताया हर्ष 


Junaid Khan - शहडोल। मध्य प्रदेश शासन की पारदर्शी नीतियों, माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के न्यायसंगत फैसले और स्थानीय प्रशासनिक प्रतिबद्धता के चलते शहडोल में कानून और नियमों की व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ हुई है। मध्य प्रदेश शासन के नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा गत 02 जून 2026 को जारी स्थानांतरण आदेश (क्रमांक 2332/5038776/2026/18-1) को निरस्त करते हुए माननीय उच्च न्यायालय (याचिका क्रमांक 19777/2026) ने सेवा नियमों के संरक्षण का महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। इस ऐतिहासिक आदेश के बाद नगरपालिका परिषद शहडोल में पदस्थ मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO वर्ग-ए) श्रीमती आशा भंडारी (मेड़ा) ने पुनः शहडोल में अपनी उपस्थिति दर्ज करा ली है। इस फैसले से न केवल प्रशासनिक निरंतरता को बल मिला है, बल्कि क्षेत्र के माननीय सांसद, स्थानीय विधायक,नगरपालिका अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, मुख्य अधिकारी और शहर की जागरूक जनता में शासन एवं न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास और गहरा हुआ है। मामले के अनुसार, 11 अगस्त 2026 को माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर की एकल पीठ (माननीय न्यायमूर्ति विशाल धगट) द्वारा पारित आदेश में मध्य प्रदेश नगरपालिका सेवा नियमों की स्पष्ट व्याख्या की गई। अदालत ने पाया कि 2014 में वर्ग-ए मुख्य नगरपालिका अधिकारी के पद पर पदोन्नत अधिकारी को नियमों के विरुद्ध 'वर्ग-बी' की नगरपालिका में स्थानांतरित नहीं किया जा सकता, क्योंकि इससे अधिकारी के सेवा वर्ग और प्रशासनिक गरिमा पर प्रभाव पड़ता है। शासन की प्रशासनिक व्यवस्था और मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 86(4) व सेवा नियम 1973 के सही क्रियान्वयन को सुनिश्चित करते हुए न्यायालय ने स्थानांतरण आदेश को निरस्त कर दिया। माननीय न्यायालय के इस संतुलित निर्णय का सम्मान करते हुए श्रीमती आशा भंडारी ने 1 सितम्बर 2026 को पुनः नगरपालिका परिषद शहडोल में अपना कार्यभार (उपस्थिति प्रतिवेदन) संभाल लिया है। यह पूरा घटनाक्रम स्थानीय सुशासन, जनप्रतिनिधियों की सक्रियता और नागरिकों के सहयोग का एक बेहतरीन उदाहरण बनकर उभरा है। शहडोल शहर में ठेकेदारों की मनमानी पर लगाम कसने, अतिक्रमण हटाने और सार्वजनिक संपत्तियों को सुरक्षित करने जैसे जनहित के कार्यों में प्रशासनिक सख्ती को शासन व स्थानीय निकायों का पूरा सहयोग मिला है। क्षेत्र के माननीय सांसद, लोकप्रिय विधायक और नगरपालिका के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष तथा मुख्य अधिकारियों ने हमेशा नियमों के पालन और जनसेवा को प्राथमिकता दी है। इस निर्णय के उपरांत स्थानीय जागरूक नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि माननीय न्यायालय के आदेश और राज्य सरकार की निष्पक्ष नीति से शहडोल के विकास कार्यों में और गति आएगी। प्रशासनिक स्तर पर नियमों की रक्षा होने से अब शहडोल नगरपालिका क्षेत्र में विकास योजनाएं और अधिक पारदर्शिता व मजबूती के साथ आगे बढ़ेंगी।

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