विकास के दावों की खुली पोल: कंधा न दे सका तंत्र, बैलगाड़ी से घर पहुंची वृद्ध महिला की मय्यत

ब्यौहारी के आखेटपुर में बदहाल सड़क ने छीना इंसानी वजूद,एंबुलेंस रास्ते में अटकी तो कीचड़ में घिसटकर ले जाना पड़ा शव; जिम्मेदार अधिकारी मूंदे हैं आंखें


Junaid Khan - शहडोल। एक तरफ जहां सरकार और स्थानीय प्रशासन चमचमाती सड़कों व विकास के बड़े-बड़े विज्ञापनों से पन्ने रंग रहा है, वहीं धरातल पर सिस्टम की संवेदनहीनता और लाचारी की ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने पूरे प्रशासनिक अमले को कठघरे में खड़ा कर दिया है। ब्यौहारी क्षेत्र के आखेटपुर अंतर्गत डाला टोला (वार्ड क्रमांक एक) में प्रशासनिक उपेक्षा का दंश झेल रहे ग्रामीणों को उस वक्त बेबसी के आंसुओं के साथ घुटने टेकने पड़े, जब एक मृतका के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए बैलगाड़ी पर लादकर ले जाना पड़ा। यह घटना केवल एक बदहाल सड़क का दर्द नहीं, बल्कि कागजी विकास के मुंह पर एक जोरदार तमाचा है।

मिली जानकारी के अनुसार, डाला टोला निवासी 70 वर्षीया वृद्ध महिला श्यामकली पटेल की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए नागपुर में भर्ती कराया गया था। जहां इलाज के दौरान उनकी दुखद मृत्यु हो गई। जब परिजन और रिश्तेदार रोते-बिलखते हुए शव को एंबुलेंस से वापस अपने गांव ला रहे थे, तब असली मुसीबत उनका इंतजार कर रही थी। वार्ड नंबर एक स्थित डाला टोला की लगभग एक किलोमीटर लंबी सड़क पूरी तरह से गड्ढों और दलदली कीचड़ में तब्दील हो चुकी थी। स्थिति इतनी भयावह थी कि एंबुलेंस चालक ने आगे बढ़ने से साफ इंकार कर दिया। परिजनों ने स्थानीय स्तर पर गुहार भी लगाई, लेकिन इस बदहाल रास्ते पर कोई चार पहिया वाहन ले जाना नामुमकिन था। अंततः, अपनों के जाने के गम में डूबे परिजनों को शासन-प्रशासन के रवैये को कोसते हुए शव को एंबुलेंस से उतारकर बैलगाड़ी पर रखना पड़ा और कीचड़ भरे रास्ते से होकर घर तक पहुंचाना पड़ा।

यह दर्दनाक मंजर देखकर स्थानीय ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। ग्रामीणों का आरोप है कि इस एक किलोमीटर लंबी जर्जर सड़क के निर्माण और मरम्मत को लेकर जनपद पंचायत, नगर परिषद और लोक निर्माण विभाग (PWD) के जिम्मेदार अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक दर्जनों बार आवेदन दिए जा चुके हैं। बावजूद इसके, हर बार सिर्फ खोखले आश्वासन ही नसीब हुए। जिम्मेदार अधिकारी दफ्तरों के वातानुकूलित कमरों में बैठकर विकास की झूठी फाइलें तैयार कर रहे हैं, जबकि ग्रामीण आज भी नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। आपातकालीन स्थिति में न तो एंबुलेंस गांव तक पहुंच पाती है और न ही कोई दूसरा वाहन। इस अमानवीय घटना ने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली और विभागीय निष्ठा पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। यदि समय रहते इस सड़क का निर्माण नहीं कराया गया और लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में उग्र जनआंदोलन तय माना जा रहा है।

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