माँ ज्वाला के प्राकट्य का प्रसंग, नवरात्रि पर कलश स्थापना, जवारा जुलूस एवं विसर्जन के साथ होंगे धार्मिक आयोजन
Junaid Khan - शहडोल। 16 अक्टूबर 2026 संभाग के उमरिया जिले में नौरोजाबाद रेलवे स्टेशन से लगभग 4 किलोमीटर उत्तर दिशा में स्थित माँ ज्वालाधाम शक्तिपीठ, उचेहरा श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है। घोड़छत्र नदी के तट और प्राकृतिक परिवेश के बीच स्थित इस पावन धाम की कहानी माँ के अनन्य भक्त की श्रद्धा, समर्पण और निःस्वार्थ सेवा से जुड़ी है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, माँ ज्वाला के प्राकट्य से जुड़ी यह कथा आज भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व रखती है।
भक्त भंडारी सिंह की श्रद्धा से जुड़ी है माँ ज्वाला के प्राकट्य की कथा
स्थानीय मान्यता के अनुसार, प्राचीन समय से ही घोड़छत्र नदी के किनारे घने जंगल में माँ ज्वाला का स्थान रहा है। उचेहरा और आसपास के गांवों के श्रद्धालु यहां पहुंचकर पूजा-अर्चना किया करते थे। इसी स्थान से जुड़ी लोककथा उचेहरा निवासी भंडारी सिंह जी की अटूट भक्ति का वर्णन करती है। कथा के अनुसार, भंडारी सिंह जी माँ ज्वाला के अनन्य भक्त थे। वे प्रतिदिन सुबह-शाम जंगल में स्थित माँ के स्थान पर जाकर पूजा करते थे। माँ के प्रति उनकी निष्ठा और समर्पण उनके जीवन का प्रमुख आधार था। कहते हैं कि एक दिन माँ ज्वाला ने भंडारी सिंह जी को स्वप्न में दर्शन दिए और उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर वरदान मांगने को कहा। इस पर भक्त ने धन-दौलत अथवा सांसारिक सुखों की कामना करने के बजाय माँ से सद्बुद्धि और जीवनभर उनकी सेवा करने का आशीर्वाद मांगा। लोकमान्यता के अनुसार, भक्त की निःस्वार्थ भावना से प्रसन्न होकर माँ ने उन्हें अपने स्थान पर मंदिर निर्माण कराने और अपनी आराधना का प्रसार करने का संदेश दिया।
महायज्ञ के दौरान दिव्य प्रकाश दिखाई देने की मान्यता
कथा के अनुसार, माँ के संदेश के बाद भंडारी सिंह जी ने ग्रामवासियों को इसकी जानकारी दी। इसके पश्चात सभी के सहयोग से वर्ष 2006-07 में माँ ज्वालाधाम के मंदिर का निर्माण कराया गया। मंदिर निर्माण के बाद ग्रामवासियों ने यहां विशाल महायज्ञ का आयोजन किया। स्थानीय मान्यता के अनुसार, यज्ञ के दौरान एक शाम मंदिर परिसर में अद्भुत आवाज सुनाई दी और दिव्य प्रकाश दिखाई दिया, जो करौंदा वृक्ष में समाहित हो गया। श्रद्धालु इस प्रसंग को माँ ज्वाला के पुनः प्राकट्य से जोड़कर देखते हैं। इसके बाद यह स्थान माँ ज्वालाधाम शक्तिपीठ, उचेहरा के नाम से प्रसिद्ध हुआ। तभी से श्रद्धालु यहां माँ के दर्शन, पूजन और अपनी मनोकामनाओं की प्रार्थना के लिए पहुंचते हैं।
भक्तों की आस्था का केंद्र है माँ ज्वालाधाम
माँ ज्वालाधाम क्षेत्र की धार्मिक आस्था, भक्ति और समर्पण का प्रतीक है। नवरात्रि सहित विभिन्न धार्मिक अवसरों पर यहां श्रद्धालु पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। धाम से जुड़ी लोककथा आज भी क्षेत्र की धार्मिक परंपरा को जीवंत बनाए हुए है।
21 अक्टूबर को होगा देवी जागरण, भक्तजन सपरिवार आमंत्रित
शारदेय नवरात्रि पर्व के अवसर पर माँ ज्वालाधाम शक्तिपीठ, उचेहरा में 21 अक्टूबर 2026, बुधवार को विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर दोपहर 2 बजे से कलश स्थापना, जवारा जुलूस एवं विसर्जन कार्यक्रम आयोजित होगा। वहीं, रात्रि 8 बजे से देवी जागरण का विशेष आयोजन किया जाएगा। देवी जागरण में कोतमा, जिला अनूपपुर, मध्यप्रदेश के गायक श्री ब्रज किशोर गुप्ता देवी भजनों की प्रस्तुति देंगे। इस दौरान श्रद्धालु माँ की भक्ति में लीन होकर भजनों का आनंद लेंगे और आध्यात्मिक वातावरण में सहभागी बनेंगे। माँ ज्वालाधाम शक्तिपीठ, उचेहरा के संस्थापक एवं प्रधान पुजारी बड़े महाराज जी ने समस्त भक्तजनों को नवरात्रि पर्व की शुभकामनाएं देते हुए धार्मिक कार्यक्रमों में सपरिवार सम्मिलित होने का आमंत्रण दिया है। उन्होंने श्रद्धालुओं से माँ ज्वाला के दरबार में उपस्थित होकर पूजा-अर्चना करने तथा देवी जागरण में सहभागिता निभाने की अपील की है।
