अफसरों की अनदेखी से त्योहार पर 2.30 लाख गरीब परिवारों के निवाले पर संकट

वाजिब मांगों पर सरकार साधे है चुप्पी,रात-दिन जनता की सेवा करने वाले राशन विक्रेताओं की सुनवाई नहीं,संघ ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी 


Junaid Khan - शहडोल। नवरात्र के पावन पर्व पर जहाँ हर घर में खुशहाली और मां भगवती की आराधना का माहौल होना चाहिए, वहीं शासन-प्रशासन की संवेदनहीनता और ढुलमुल कार्यशैली के कारण जिले के लगभग 2 लाख 30 हजार से अधिक गरीब और जरूरतमंद परिवारों के चूल्हे ठंडे पड़ने की नौबत आ गई है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत आमजन तक खाद्यान्न पहुँचाने की रीढ़ माने जाने वाले राशन विक्रेताओं की न्यायसंगत मांगों को लंबे समय से ठंडे बस्ते में डाल रखा गया है। विभागीय अधिकारियों की हठधर्मिता और शासन की बेरुखी से तंग आकर अंततः राशन विक्रेता संघ को 1 से 7 अक्टूबर तक पूर्णतः काम बंद हड़ताल का कड़ा कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा है। इसके बावजूद जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं और समाधान का रास्ता निकालने के बजाय मौन साधे बैठे हैं। यदि समय रहते प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो त्योहारों के इस मौसम में गरीबों के खाद्यान्न का संकट और अधिक गहराना तय है।

हर परिस्थिति में मोर्चा संभालने वाले विक्रेताओं की नहीं हो रही सुनवाई 

उल्लेखनीय है कि प्राकृतिक आपदा हो या कोई विकट परिस्थिति, ये राशन विक्रेता, सेवा सहकारी समितियां, वन समितियां और स्व-सहायता समूह के कार्यकर्ता हमेशा अग्रिम पंक्ति में खड़े रहकर अंतिम व्यक्ति तक अनाज पहुँचाने का काम करते हैं। दिन-रात एक करके जनसेवा करने वाले इन विक्रेताओं को आज अपने ही हक और न्याय के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। संघ की मुख्य मांगों में खाद्यान्न वितरण पर मिलने वाले कमीशन में न्यायोचित वृद्धि, खाद्यान्न की तौल व परिवहन के दौरान होने वाले नुकसान की भरपाई हेतु निर्धारित छूट तथा कमीशन का भुगतान हर माह एक निश्चित तारीख पर करना शामिल है। विक्रेताओं का कहना है कि वे वर्षों से बेहद कम संसाधनों और सरकारी विसंगतियों के बावजूद लगातार सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उच्च अधिकारियों की उपेक्षात्मक नीति के कारण उनका भरण-पोषण और व्यवस्था का संचालन मुश्किल हो गया है। शहरी क्षेत्रों के उपभोक्ता भंडारों से लेकर ग्रामीण अंचलों की दुकानों पर ताले लटके हैं, फिर भी अफसरशाही हाथ पर हाथ धरे बैठी है।

मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा संघर्ष,आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी

राशन विक्रेता संघ के पदाधिकारियों ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी जायज मांगों का स्थायी निराकरण नहीं हो जाता, तब तक दुकानों का संचालन किसी भी हाल में शुरू नहीं किया जाएगा। यदि 7 अक्टूबर तक शासन और संबंधित विभागीय अधिकारियों ने संघ की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया और वार्ता के माध्यम से हल नहीं निकाला, तो इस आंदोलन को अनिश्चितकाल के लिए और अधिक उग्र रूप दिया जाएगा। प्रशासनिक अधिकारियों की इस घोर लापरवाही का खामियाजा आज जिले की विशाल आबादी को भुगतना पड़ रहा है। अब देखना यह होगा कि कुंभकर्णी नींद में सोया जिला प्रशासन और खाद्य विभाग कब हरकत में आता है या फिर त्योहारों के बीच गरीबों के निवाले पर गहराए इस संकट को यूं ही अनदेखा करता रहता है।

Previous Post Next Post