₹2.5 करोड़ के पुल में खुला भ्रष्टाचार का गड्ढा,MPRDC ने कैसा पुल बनाया कि लोकार्पण से पहले ही हो गया क्षतिग्रस्त

एनएच-43 मुड़ना नदी पुल का 4 फीट कंक्रीट टूटकर नीचे गिरा,सरियों की मोटाई पर भी उठे गंभीर सवाल,सोशल मीडिया पर मुद्दा गरमाने के बाद स्पॉट पर पहुंचे अफ़सर,कराई जा रही लोड टेस्टिंग


Junaid Khan - शहडोल। मध्य प्रदेश में नेशनल हाईवे और राज्य मार्ग निर्माण में चल रहे भ्रष्टाचार व कमीशनखोरी का जीता-जागता नमूना एक बार फिर शहडोल में सामने आया है। नेशनल हाईवे-43 स्थित शहडोल बाईपास मार्ग पर मुड़ना नदी पर लगभग ₹2.5 करोड़ की भारी-भरकम लागत से तैयार किया गया पुल अपने आधिकारिक उद्घाटन से पहले ही ताश के पत्तों की तरह ढहने लगा है। शनिवार को इस नवनिर्मित पुल के बीचों-बीच ढलाई का लगभग 4 फीट का बड़ा कंक्रीट हिस्सा अचानक टूटकर सीधे नीचे नदी में जा गिरा, जिससे पुल में एक खौफनाक सुराख बन गया। जिस मार्ग से जल्द ही सुगम आवागमन का दावा किया जा रहा था, वह चालू होने से पहले ही तकनीकी खामियों और घटिया सामग्री की भेंट चढ़ गया। हैरानी की बात यह भी है कि करीब डेढ़ वर्ष पूर्व भी इस पुल के दूसरे हिस्से में ठीक इसी प्रकार कंक्रीट धंसने की घटना हो चुकी है। इसके बावजूद लोक निर्माण और निर्माण एजेंसियों ने सबक लेने के बजाय सिर्फ लीपापोती की, जिसका नतीजा आज जनता के सामने है। पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से में दिख रहे लोहे के पतले सरिए और भरभराकर गिरा कंक्रीट चीख-चीखकर चीफ इंजीनियर, कंसलटेंट और ठेका कंपनी की सांठगांठ की दास्तान बयां कर रहे हैं।

अधिकारियों की नींद उड़ी, आनंद-फानन में पहुंचे स्पॉट पर और शुरू कराई मरम्मत

लोकार्पण से पहले ही करोड़ों के पुल के क्षतिग्रस्त होने और निर्माण की गुणवत्ता पर चारों तरफ से थू-थू होने के बाद मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MPRDC) के आला अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। उल्लेखनीय है कि नेशनल हाईवे-43 पर इस पूरी सड़क और पुल निर्माण का जिम्मा MPRDC की देखरेख में तत्कालीन ठेका कंपनी टीवीसीएल (TVCL) के पास था। इस शर्मनाक हादसे की तस्वीरें और भ्रष्टाचार की दास्तान सोशल मीडिया पर जैसे ही तेजी से वायरल हुई, पूरा प्रशासनिक महकमा बैकफुट पर आ गया। रविवार को MPRDC का पूरा तकनीकी अमला, इंजीनियर और ठेका कंपनी के कर्मचारियों की पूरी फौज लेकर आनन-फानन में मुड़ना नदी पुल के स्पॉट पर पहुंचा। विभाग ने बदनामी से बचने और मामले को दबाने की नीयत से आनन-फानन में क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत का काम शुरू कराया है। इसके साथ ही पुल के चार अलग-अलग हिस्सों को काटकर उसकी क्षमता और मजबूती का आकलन करने के लिए लोड टेस्टिंग की कार्रवाई शुरू की गई है।

लापरवाह सिंडिकेट पर हो आपराधिक कार्रवाई, सजग जागरूक जनता और मीडिया का आभार

करोड़ों रुपये की लागत से बने इस पुल पर आधिकारिक रूप से आवागमन की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद सुरक्षा के कोई ठोस इंतज़ाम न होने से लगातार भारी वाहन गुज़र रहे थे, जिससे बड़ी जनहानि की आशंका बनी हुई थी। यह पूरा घटनाक्रम सिद्ध करता है कि निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार शासकीय अधिकारियों ने कमीशनखोरी के चक्कर में जनता के टैक्स के पैसों की सरेआम बर्बादी की है। यदि समय रहते इस घटिया निर्माण की कलई न खुलती, तो चालू होने के बाद यहाँ भीषण हादसा निश्चित था। ऐसे भ्रष्ट सिस्टम, लापरवाह इंजीनियरों और जिम्मेदार अफ़सरों के खिलाफ कड़े कदम उठाते हुए आपराधिक मामला दर्ज होना अति-आवश्यक है। इसके साथ ही, इस गंभीर मुद्दे को प्रमुखता से सामने लाने वाले जिम्मेदार नागरिकों, सजग मीडिया और सोशल मीडिया यूज़र्स का भी साधुवाद और धन्यवाद, जिनके माध्यम से वायरल हुई खबर के बाद आखिरकार सो रहा प्रशासन नींद से जागा और त्वरित संज्ञान लेकर मौके पर मरम्मत व जाँच की प्रक्रिया शुरू करने को मजबूर हुआ।

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