वन्यजीव-मानव संघर्ष की आहट,केशवाही के जंगलों में छत्तीसगढ़ से भटके एकाकी हाथी की दस्तक,अलर्ट मोड पर वन अमला

वन्यजीव-मानव संघर्ष की आहट,केशवाही के जंगलों में छत्तीसगढ़ से भटके एकाकी हाथी की दस्तक,अलर्ट मोड पर वन अमला


Junaid Khan - शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में एक बार फिर हाथियों के मूवमेंट से वन विभाग और मैदानी इलाकों में हलचल तेज हो गई है। जिले के दक्षिण वन मंडल अंतर्गत आने वाले केशवाही वन परिक्षेत्र में सोमवार तड़के छत्तीसगढ़ की सीमा से भटक कर आए एक एकाकी (लोनर) जंगली हाथी ने दस्तक दी है। दल से बिछड़े इस हाथी की मौजूदगी तेंदूटोला और रमना कनेर के समीप जंगलों में दर्ज की गई है। हाथी के प्रवेश करते ही वन विभाग की गश्ती टीमों को अलर्ट मोड पर रख दिया गया है और पूरे परिक्षेत्र में सुरक्षात्मक प्रोटोकॉल लागू कर दिए गए हैं। छत्तीसगढ़ में तबाही के बाद मध्य प्रदेश की सीमा में प्रवेश प्राप्त प्रामाणिक जानकारी के अनुसार, यह हाथी पिछले कुछ दिनों से छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती वन क्षेत्रों में विचरण कर रहा था, जहाँ इसने ग्रामीण बस्तियों में घुसकर कुछ मकानों को क्षतिग्रस्त किया और फसलों को नुकसान पहुँचाया। सोमवार सुबह लगभग 4:00 बजे यह हाथी सीमा लांघकर शहडोल जिले के केशवाही परिक्षेत्र के तेंदूटोला जंगल में दाखिल हुआ। झुंड से बिछड़े एकाकी हाथी प्रायः अत्यधिक आक्रामक और अनपेक्षित व्यवहार वाले होते हैं। यही कारण है कि वन प्रशासन स्थिति की गंभीरता को देखते हुए किसी भी प्रकार की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। मैदानी स्तर पर मुस्तैदी: मुनादी, निगरानी और तकनीक का समन्वय। घटना की पुष्टि करते हुए केशवाही रेंजर अंकुर तिवारी ने बताया कि हाथी की मूवमेंट पर 24 घंटे नजर रखने के लिए विशेष ट्रैकिंग टीमों का गठन किया गया है। विभाग की प्राथमिकता किसी भी संभावित जन-धन की हानि को रोकना है। गांवों में एलर्ट व मुनादी: प्रभावित और संवेदनशीलता की श्रेणी में आने वाले समीपस्थ ग्रामीण क्षेत्रों (जैसे तेंदूटोला, रमना कनेर एवं आसपास की बस्तियों) में मुनादी कराई जा रही है। ग्रामीणों को हिदायत दी गई है कि वे भोर या देर शाम जंगल की ओर न जाएं, महुआ/इमली बीनने से बचें और घरों के बाहर खुले में न सोएं। गजरक्षक' डिजिटल सर्विलांस: ट्रैकिंग टीमों को धरातल पर तैनात करने के साथ-साथ डिजिटल मॉनिटरिंग पर जोर दिया जा रहा है। जिन ग्रामीणों के पास स्मार्टफोन हैं, उनमें 'गजरक्षक एप' इंस्टॉल कराया जा रहा है। इस तकनीक के जरिए हाथी की लोकेशन का रियल-टाइम अलर्ट सीधे ग्रामीणों के मोबाइल पर भेजा जाएगा। सजगता और आपात संपर्क: रेंजर ने अपील की है कि हाथी को देखने पर उकसाने, फोटो/वीडियो खींचने या उसके पास जाने का दुस्साहस न करें। किसी भी आपात स्थिति में तुरंत वन विभाग की कंट्रोल रूम या बीट गार्ड को सूचना दें।

केशवाही कॉरिडोर: बार-बार क्यों आ रहे हैं हाथी? वरिष्ठ वन्यजीव विशेषज्ञों और पत्रकारिता के परिप्रेक्ष्य से देखें तो केशवाही और अमरकंटक से लगा यह संपूर्ण वन क्षेत्र अब पारंपरिक हाथी गलियारे (Elephant Corridor) का हिस्सा बनता जा रहा है। छत्तीसगढ़ के गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान और सरगुजा अंचल से भटक कर हाथियों का दल या एकाकी नर हाथी नियमित रूप से शहडोल संभाग के जंगलों का रुख कर रहे हैं। केशवाही क्षेत्र में यह पहली घटना नहीं है; इससे पूर्व भी यहाँ हाथियों की मौजूदगी दर्ज की गई है, जिन्हें सुरक्षित रेस्क्यू कर या वापस खदेड़ कर स्थिति को नियंत्रित किया गया था। हालाँकि, जंगलों के विखंडन (Forest Fragmentation) और आहार की तलाश में हाथियों का आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख करना अब एक स्थायी चुनौती बनता दिख रहा है। प्रशासनिक समन्वय: क्या वन विभाग के साथ स्थानीय पुलिस और राजस्व अमला स्थिति से निपटने के लिए संयुक्त कार्ययोजना बना रहा है?क्षतिपूर्ति प्रक्रिया: छत्तीसगढ़ में हुए नुकसान के बाद, यदि शहडोल क्षेत्र में फसलों या घरों को नुकसान होता है, तो त्वरित मुआवजा वितरण की क्या तैयारी है? कॉरिडोर प्रबंधन: क्या मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ वन विभाग के बीच अंतरराज्यीय रियल-टाइम डेटा शेयरिंग सुचारू रूप से कार्य कर रही है?

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