डॉ. आर. पी. साहू के नेतृत्व में प्रशासनिक उपेक्षा और सरकार की वादाखिलाफी के खिलाफ उठी बुलंद आवाज
Junaid khan - शहडोल। ऑल इंडिया बैकवर्ड क्लासेस फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय महासचिव डॉ. आर. पी. साहू के कुशल नेतृत्व में प्रांतीय प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर एवं संभागायुक्त के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति महोदय तथा माननीय प्रधानमंत्री जी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के जरिए देश व प्रदेश में जातीय जनगणना के दौरान अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए स्पष्ट कॉलम अंकित किए जाने तथा जनसंख्या के अनुपात में 52 प्रतिशत आरक्षण देने की पुरजोर मांग की गई है। इसके अलावा 27 प्रतिशत लंबित आरक्षण को तत्काल लागू करने, शासकीय व निजी क्षेत्रों, विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका में आनुपातिक प्रतिनिधित्व देने तथा क्रीमीलेयर की व्यवस्था को पूर्णतः समाप्त करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों के लिए सतत संघर्षरत ऑल इंडिया बैकवर्ड क्लासेस फेडरेशन का यह कदम पिछड़े, वंचित और शोषित वर्गों को उनका हक दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक और सराहनीय पहल है। डॉ. आर. पी. साहू के मार्गदर्शन में संघ लगातार जमीनी स्तर पर जनता की आवाज को मजबूती से शासन-प्रशासन के सामने रख रहा है। ज्ञापन में न केवल पिछड़ों के हक की बात की गई, बल्कि शासकीय सेवाओं में पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने, कॉलेजियम सिस्टम समाप्त कर भारतीय न्यायिक सेवा के गठन, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू कर किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाने और यूजीसी बिल लागू करने जैसी दूरगामी जनहितैषी मांगों को शामिल कर संघ ने अपनी व्यापक व समावेशी सोच का परिचय दिया है। दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम ने शासन-प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों की लचर कार्यप्रणाली एवं उदासीन रवैये को उजागर कर दिया है। मध्य प्रदेश में ओबीसी वर्ग का 27 प्रतिशत आरक्षण रोककर महज 14 प्रतिशत पर सीमित रखना और 13 प्रतिशत परिणामों को होल्ड पर रखना प्रशासनिक अदूरदर्शिता और सरकारी उपेक्षा का स्पष्ट प्रमाण है। जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी जनता की ज्वलंत समस्याओं और संवैधानिक अधिकारों के क्रियान्वयन में लगातार टालमटोल की नीति अपना रहे हैं। स्थानीय स्तर पर भी वार्ड क्र. 18 की आवासीय बस्ती से गुजरने वाली हाई-टेंशन बिजली लाइन से हो रही मौतों और स्वास्थ्य/रेल सुविधाओं की बदहाली पर जिम्मेदार अधिकारियों की खामोशी प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। ऑल इंडिया बैकवर्ड क्लासेस फेडरेशन के इस उग्र और तर्कसंगत विरोध ने सोए हुए प्रशासनिक अमले और सरकार की नीतियों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
