नवदुर्गा का डिजिटल अवतार,साइबर युग में नारी सुरक्षा की नई चेतना-साइबर एक्सपर्ट प्रशांत द्विवेदी
Junaid khan - शहडोल। इस पावन शारदीय नवरात्रि में जब हम महिषासुरमर्दिनी मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा कर रहे हैं, तो समाज के रूप में हमें एक गंभीर आत्मनिरीक्षण की आवश्यकता है। आज की 'महिषासुर' भौतिक दुनिया से कहीं अधिक डिजिटल जगत में सक्रिय हैं। आज की नारी और बच्चियां इंटरनेट, सोशल मीडिया और एआई के युग में जी रही हैं, जहां उनके आत्मसम्मान, निजता और सुरक्षा पर अदृश्य डिजिटल आसुरी शक्तियों का खतरा मंडरा रहा है। इस डिजिटल युग में महिलाओं और बच्चियों की साइबर सुरक्षा को हम देवी के 9 रूपों से प्रेरणा लेकर 9 सुरक्षा सूत्रों के रूप में समझ सकते हैं, जो उन्हें डिजिटल जगत में सशक्त और सुरक्षित बनाएंगे। प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री हमें डिजिटल जगत में दृढ़ संकल्प और अटूट जागरूकता की सीख देती हैं। इंटरनेट का उपयोग करते समय हमें यह संकल्प लेना होगा कि हम किसी भी अनजान लिंक, लुभावने विज्ञापनों या संदिग्ध वेबसाइटों पर क्लिक नहीं करेंगे। यह दृढ़ता ही डिजिटल सुरक्षा की पहली सीढ़ी है। द्वितीय स्वरूप माँ ब्रह्मचारिणी का स्वरूप हमें डिजिटल ज्ञान और साक्षरता अर्जित करने की प्रेरणा देता है। महिलाओं को सोशल मीडिया की प्राइवेसी सेटिंग्स, मजबूत पासवर्ड बनाने के तरीकों और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जैसी सुरक्षा तकनीकों को समझना और अपनाना चाहिए। तृतीय स्वरूप माँ चंद्रघंटा की घंटे की ध्वनि हमें हर पल सतर्क रहने का संदेश देती है। डिजिटल दुनिया में किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज, लॉटरी के झांसे या फिशिंग ईमेल को देखते ही हमारे भीतर सतर्कता की घंटी बज जानी चाहिए। वहीं चतुर्थ स्वरूप माँ कुष्मांडा का दिव्य रूप हमें एक सुरक्षित और सकारात्मक डिजिटल परिवेश का निर्माण करना सिखाता है। सोशल मीडिया पर अपनी बेहद निजी जानकारी, जैसे कि लाइव लोकेशन, घर का पता या बच्चों के स्कूल का नाम साझा करने से बचना चाहिए ताकि कोई हमारी निजता का गलत फायदा न उठा सके। पंचम स्वरूप माँ स्कंदमाता वात्सल्य की प्रतिमूर्ति हैं, जो माता-पिता को बच्चों का कुशल डिजिटल संरक्षक बनने की सीख देती हैं। अभिभावकों को अपनी बच्चियों की ऑनलाइन गतिविधियों पर स्नेहमयी नजर रखनी चाहिए, इंटरनेट के खतरों पर उनसे खुलकर बात करनी चाहिए और एक ऐसा मित्रवत माहौल बनाना चाहिए जहां बच्चे किसी भी ऑनलाइन समस्या को बिना डरे साझा कर सकें। इसके आगे षष्टम स्वरूप माँ कात्यायनी का जुझारू स्वरूप हमें अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की शक्ति देता है। यदि कोई बच्ची या महिला साइबर बुलिंग, डीपफेक या किसी भी प्रकार के ऑनलाइन उत्पीड़न का शिकार होती है, तो उसे चुप रहने के बजाय तुरंत विरोध करना चाहिए। सप्तम स्वरूप माँ कालरात्रि दुष्टों का नाश करने वाली हैं, जो हमें साइबर अपराधियों के खिलाफ कठोर कदम उठाने का साहस देती हैं। डिजिटल उत्पीड़न से डरने के बजाय महिलाओं को राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल या राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत शिकायत दर्ज करानी चाहिए ताकि अपराधियों को उनके किए की सजा मिल सके। इसके बाद अष्टम स्वरूप माँ महागौरी का पवित्र स्वरूप हमें डिजिटल स्वच्छता बनाए रखने की प्रेरणा देता है। हमें अपने फोन और कम्प्यूटर को संदिग्ध ऐप्स, मैलवेयर और डेटा चुराने वाले सॉफ्टवेयर से मुक्त रखकर अपनी डिजिटल छवि को हमेशा स्वच्छ और सुरक्षित रखना चाहिए। अंतिम स्वरूप माँ सिद्धिदात्री हमें संपूर्ण आत्मनिर्भरता और डिजिटल सशक्तिकरण का वरदान देती हैं। तकनीक का उपयोग केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि प्रगति और ज्ञान के लिए होना चाहिए। देश की बेटियों को कोडिंग, एआई और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़कर खुद को सर्वगुण संपन्न और आत्मनिर्भर बनाना होगा। यह नवरात्रि केवल उपवास और गरबा तक सीमित न रहे,आइए इस बार हम अपने घर की देवियों को डिजिटल कवच प्रदान करने का संकल्प लें, क्योंकि जब देश की हर बेटी डिजिटल रूप से सुरक्षित होगी, तभी सच्चे मायनों में माँ दुर्गा की आराधना सार्थक होगी। संस्कारों से सशक्त और सजगता से सुरक्षित होंगी देश की बेटियां; तभी हर घर में मुस्कुराएंगी डिजिटल युग की देवियां। साइबर एक्सपर्ट प्रशांत द्विवेदी।

